सही करियर कैसे चुने ? ये भी एक कला हे !

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सही करियर कैसे चुने ?

क्या आपको पता है की भारत मैं लगभग हर घंटे एक विद्यार्थी आत्मा हत्या करता हे । अगर नहीं पता तो देखिये नेशनल क्राइम बेउरो की २०१५ की रिपोर्ट ।

ऐसा क्यों होता हे की एक अच्छा विद्यार्थी होने के बाद भी वो आत्मा हत्त्या जैसे डरावने क़दम उठाता हे ।
जवाब साफ़ हे की वो कही न कही इतना परेशां हे या करियर से असंतुष्ट हे की वो ऐसे क़दम उठाने पर मजबूर हो जाता है । चलिए हम कुछ आंकड़ों पर नज़र डालते हैं

भारत मैं लगभग ८०० से ज़्यादा विश्व विद्यालय और ३९००० से ज़्यादा विद्यालय हैं जहाँ से हर साल ३० लाख से ज़्यादा विध्यार्ती ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री लेकर निकलते हैं

भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्था बनाये हुए है । यहाँ के विद्यालयों और विश्वविद्यालयों मैं लगभग २ करोड़ विद्यार्थियों को पढ़ाने की क्षमता हे।

सवाल ये हे की इतना सब कुछ होने के बाद भी यहाँ की प्राइवेट और सरकारी संस्थाओं में ३५ प्रतिशत लोग ही नौकरी हासिल कर पते हैं । बाकि के ६५ प्रतिशत लोग अपनी ज़िन्दगी पुनः संघर्ष में लगाते रहते हैं ।

और सोने पे सुहागा तो ये है की इन ३५ प्रतिशत नौकरी पाने वालो मैं सिर्फ २० प्रतिशत ही संतुष्ट हो पते हैं और बचे ८० प्रतिशत सिर्फ खुद को धक्का दे रहे होते हैं की किसी प्रकार रोज़ी रोटी चल जाये ।

सवाल ये है की ऐसा क्यों होता है ?

इसकी शुरुआत ज़्यादातर बचपन से हो जाती है खासकर जब बच्चा दसवीं कक्षा उत्तीर्ण कर लेता हे तब। होता क्या हैं की उस समय उसकी उम्र बोहोत कम होती है और अनुभव भी नहीं होता, उस समय वो पूरी तरह अपने बड़ों या माता पिता पर निर्भर होता है । तब माता पिता या घर के बड़े अपने जीवन मैं इतने व्यस्त रहते हैं की वो ये समझ नहीं पते की उस बच्चे के लिए कोनसे विकल्प बेहतर हैं । यहाँ कुछ लोग इस काम को बिगाड़ने मैं खास भूमिका निभाते हैं जो निम्न प्रकार हैं।

१. माता पिता खुद
२.दोस्त
३.रिश्तेदार
४. पडोसी

advises

माता पिता : – अक्सर आपने देखा होगा की एक डॉक्टर अपने बच्चों को डॉक्टर ही बनाना पसंद करता हे।
एक अध्यापक भी अपने बच्चो से एहि चाहते हैं की वो भी इसी विकल्प को चुने या ऐसा भी होता है की जो पिता या माता या दादाजी खुद कुछ नहीं बन पाए वो सपना अब इस बच्चे को पूरा करना होता है। और ज़बर्दस्ती वो करियर उस बच्चे को चुनना पड़ता है। वो अपने जीवन मैं सफल हो पाएगा या नहीं हो पायेगा इसे कोई नहीं देखता लेकिन अपने जीवन और समय को वो ज़रूर बर्बाद कर लेता है । बाद मैं आगे जाकर जब वो समझदार बनता हे तब उसे समझ आता है की उसके साथ क्या अन्याय हुआ जिसकी भरपाई वो पूरी ज़िंदे नहीं कर पायेगा।

दोस्त :- मैं कहता हु करियर के अगर कोई बड़े दुश्मन हैं तो शायद वो दोस्त होंगे । आप सोच रहे होंगे की मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ, ये कहना उचित नहीं है । हर दोस्त ऐसा नहीं होता । हाँ ये बात सही हे की हर दोस्त ऐसा नहीं होता लेकिन जिस उम्र मैं हम करियर चूज़ करने की बात करते हैं तब हमारे दोस्त भी उतनी ही उम्र के न समझ होते हैं । इसी लिए एक न समझ की सलाह लेना न समझी ही कहलाई जाती हे । उदहारण के तोर पर जैसे ….
१. मेरे दोस्त ने मैथ्स ली हे क्यों की उसे इंजीनियर बनना हे तो मैं भी वही ले लेता हु

२. मेरा दोस्त कह रहा था बायोलॉजी ले ले इसमें आगे बोहोत अच्छा स्कोप हे हम डॉक्टर भी बन सकते हैं । देख मेरे बुआ जी का लड़का आज डॉक्टर की पढाई कर रहा है । आगे चल के तो उसके ऐश ही ऐश हैं ।

३. देख अपने सारे दोस्तों ने कॉमर्स ली है और सब ने उस बड़े कॉलेज मैं एडमिशन भी ले लिया है तू भी कॉमर्स ले ले फिर हम सब एक जगह ही हो जायेंगे और मजे करेंगे दोस्ती निभानी तो पड़ेगी अब तुझे भी ।

ये कुछ बातें अक्सर उम्र के इस मोड पर होती ही हैं जिसे आप नज़र अंदाज़ नहीं कर सकते ।

रिश्तेदार और पडोसी :- ये तो हद कर देते हैं। फ्री की जितनी सलाह ये देते हैं कोई नहीं दे सकता । उदहारण देखिये ।
१. शर्मा जी आपका बच्चा बोहोत समझदार है, मैं इसकी बातों से अंदाज़ा लगा लिया ये आई ऐ एस अफसर बनेगा मेरी राय मानिये अआप इसे आर्ट्स दिलाइये और अभी से आई ऐ एस की तैयारी कराइये, सोचिये जब ये अफसर बनेगा तो हम सबका कितना सम्मान समाज मैं बढ़ जायेगा के आपका बेटा कलेक्टर है । वाह और शर्मा जी उनकी ये मीठी बातें मान भी लेते हैं और अपने बच्चे की बिना मर्ज़ी पूंछे उसे आर्ट्स दिलवा देते हैं ।

ये चंद उदहारण जो मैंने आपको बताएं हैं ये सच मैं बोहोत घातक होते हैं जो न सिर्फ विद्यार्थी का जीवन ख़राब करते हैं बल्कि उनके आने वाली सन्तानो का भी कर देते हैं क्यों की जब वो बचपन से जवानी तक गलत फैसले लेने के आदि हो जाते हैं तो वो यही फैसले अपने बच्चो के लिए भी लेते हैं ।

adult career

वयस्कों का अपने करियर को चुनना ।

जब जब ये बच्चा विद्यार्थी ग्रेजुएट हो जाता है तब इसे एक और मौक़ा मिलता है अपने मास्टरी कोर्स को चुनने का । यहाँ या तो विद्यार्थी अपने सब्जेक्ट को जारी रखते हैं ओर उसी मैं मास्टरी करते हैं या अगर वो इस सब्जेक्ट से खुश नहीं हैं तो उसे बदलने की सोचते हैं । अगर अभी वो सही फैसला ले पाते हैं तो ये आगे चल कर उनके जीवन मैं एक उत्थान ले के आता है और वो अपने करियर की बुलंदियों को छूने लगते हैं । लेकिन अगर वो इसके विपरीत पुनः बहकावे मैं आकर गलती कर लेते हैं तो उनके लिए जीवन नरक जैसा बन जाता है ।

सवाल ये है की क्या हम इस गलती को सुधार सकते हैं ?
क्या हम कभी भी जीवन के किसी भी मोड़ पर अपना करियर बना सकते हैं ?
अगर बना सकते हैं तो कैसे ?
और क्या हम करैं कोनसा करियर हमारे लये अच्छा हैं ?
हमारे अभी भी समझ नहीं आता कैसे इसे चूज़ करैं ?

choose career

तो चलिए आज मैं आपको बता देता हूँ के कैसे करियर चूज़ किया जाता है ।

सबसे पहले अपना खुद का साक्षत्कार (इंटरव्यू ) लें ।
सवाल पूंछें खुद से की क्या ऐसी चीज़ है जो आपको करने मैं सबसे ज़्यादा मज़ा आता है । उसकी लिस्ट बनायें फिर उसमे से भी सबसे अच्छी चीज़ निकालें जो आप बोहोत इंटरेस्ट से करते हों ।

जब आप अपना सेल्फ इंटरव्यू ले लेंगे तो आप को ये समझ आने लगेगा की की आपके लिए अच्छा क्या हे
। उदहारण के तोर पे अगर आप वयवसाय करते हैं लेकिन आप को कही अच्छी नौकरी करना ही पसंद हैं और उसमे आपको आत्म संतुष्टि मिलती है तो आप वही करैं, आप ज़्यादा खुश रहेंगे ।

अगर आपको बोलना पसंद है या आपको पब्लिक स्पीकिंग पसंद है तो आप पॉलिटिक्स या एंकरिंग करने जैसे करियर चुन सकते हैं

अपने स्ट्रांग पॉइंट्स को लिखिए और अपने वीक पॉइंट्स को भी लिखिए । जो मज़बूत बिंदु हैं उन्हें और आगे बढ़ाते हुए उसमे करियर ढूंढिए और जो कमज़ोर बिंदु हैं उन पर मेहनत करके उनमे मज़बूती पैदा कीजिये ।

शार्ट टर्म और लॉन्ग टर्म गोल सेट करिये । शार्ट टर्म मैं वो चीज़ें सीखिए जो आपके व्यक्तित्व को सुधारें चाहे वो छोटे मोटे कोर्स या सर्टिफिकेट ही क्यों न हो।
१. जैसे इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स।
२. डिजिटल मार्केटिंग कोर्स
३. वेबसाइट डिज़ाइन कोर्स
४. योगा कोर्स
इस तरह आप अपने पसंदीदा कोर्स चुन कर शार्ट टर्म गोआल चुन सकते हैं । ये शार्ट टर्म गोल आपको आपके करियर मैं बोहोत ज़्यादा लाभ देते हैं ।

लॉन्ग टर्म गोल वो होते हैं जिसमे आप ये टारगेट सेट कर सकते हैं, जैसे की मुझे अब से ५ साल मैं अपनी कंपनी को या पोजीशन को कहा लेके जाना है
अगर आप करियर के शुरूआती दौर मैं हैं तो आप अभी से खुद पर रिसर्च करके ये फैसला कर सकते हैं के मेरे लिए कोनसी डिग्री या यूनिवर्सिटी बेहतर है जहा मैं लॉन्ग टर्म मैं अपना करियर सेट कर सकता हूँ ।

अगर फिर भी आपको लगता है की अब भी कन्फूज़न है तो मेरी सलाह हे की आपको एक करियर काउंसलर को चुनना चाहिए । उसकी सलाह की भले आपको क़ीमत देनी पड़े लेकिन वो पैसो से ली गई सलाह आपके जीवन को पूर्ण रूप से परिवर्तित कर करियर की बुलंदियों पर ले जाएगी ।

guidance

हाँ दोस्तों एक अनुभवी सलाहकार यानि करियर काउंसलर आपको पहले पूरी तरह से समझेगा आपका टेस्ट भी लेगा फिर उस निष्कर्ष पर आपको सलाह देगा जो आप शायद सोच नहीं सकते या समझ नहीं पा रहे थे अब तक की आप को असल में क्या करना था ।

कुछ ऐसे ही करियर काउंसलर सर्विसेज देने वाले अनुभवी लोग भी हैं जो की समाज सेवक भी हैं और उनकी सलाह की क़ीमत होने के बाद भी वो समाज सेवक होने के नाते अपनी सलाह फ्री मैं देते हैं और आपसे अच्छी इंफोरमेशन साझा करते हैं जैसे राइज अप एजुकेशन ये एक ऐसी संस्था है जहाँ आपको बोहोत कुछ सीखने को मिलता हैं। ये करियर से जुड़े उन पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं जहा हर उम्र के लोग उन बातों से फायदा ले कर अपने करियर मैं बदलाव ला सकते हैं और जिस भी राह मैं उनकी इच्छा होती है उसको बुलंदियों तक ले जा पाते हैं । आप भी इनसे जुड़ कर इस अवसर का पूर्ण लाभ ले सकते हैं । मैं कुछ लिंक साझा कर रहा हु जिन पर जा कर आप बोहोत कुछ हासिल कर सकते हैं और अपने जीवन को उत्कृष्ट बना सकते हैं ।

धन्यवाद्
एम्. फ़ज़ील

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